"TMC को एक और झटका,कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम ने दिया इस्तीफा"

"TMC को एक और झटका,कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम ने दिया इस्तीफा"

Kolkata Mayor Firhad Hakim resigns.

Kolkata Mayor Firhad Hakim resigns.

कोलकाता। Kolkata Mayor Firhad Hakim resigns. बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट और अंतर्कलह के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया।

दोपहर में निगम मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में हकीम ने इस्तीफे की घोषणा की।

गौरतलब है कि हकीम को लेकर लगातार दूसरे दिन यह किसी नगर निगम के मेयर का इस्तीफा है। एक दिन पहले गुरुवार को बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हकीम साल 2018 से कोलकाता के मेयर पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

हकीम ने इस दौरान इतने वर्ष तक कोलकाता जैसे महत्वपूर्ण शहर के मेयर पद पर काम करने की जिम्मेदारी देने के लिए पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी का आभार व्यक्त किया।

मालूम हो कि तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता व विधायक कुणाल घोष ने बुधवार को ही दावा किया था कि हकीम ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी से मेयर पद छोड़ने की दोबारा अनुमति मांगी थी, जिसकी इजाजत उन्होंने दे दी। इसके बाद से ही अटकलें थी कि हकीम मेयर पद छोड़ देंगे।

कुणाल घोष ने दावा किया था कि भाजपा के बंगाल की सत्ता में आने के बाद कोलकाता नगर निगम के कामकाज में आ रही आ रही कठिनाइयों का हवाला देते हुए हकीम पहले भी इस्तीफा देना चाहते थे। उस समय ममता बनर्जी ने उन्हें पद पर बने रहने के लिए कहा था।

हालांकि, बुधवार को उन्होंने दोबारा इस्तीफे की अनुमति मांगी, जिसके बाद पार्टी प्रमुख सहमत हो गईं। यह घटनाक्रम हाल के हफ्तों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती अनिश्चितता और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में पार्टी के कई पार्षदों के लगातार इस्तीफे के बीच हुआ है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उनके इस्तीफे के बाद कोलकाता का अगला मेयर कौन होगा।

2018 से कोलकाता के मेयर पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे हकीम

उल्लेखनीय है कि कोलकाता नगर निगम पर साल 2010 से तृणमूल कांग्रेस का नियंत्रण है। तृणमूल के एक प्रभावशाली अल्पसंख्यक चेहरे हकीम 2018 से कोलकाता के मेयर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

हकीम ममता बनर्जी नीत पूर्ववर्ती सरकार में 15 वर्ष तक मंत्री के रूप में कई विभाग भी संभाले हैं।